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626 कबीर साहेब प्रकट दिवस

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🔸पाप विनाशक कबीर प्रभु सम्पूर्ण शांति दायक, कविरंघारिसि = कबीर परमेश्वर (अंघ) पाप का (अरि) शत्रु (असि) है अर्थात् पाप विनाशक कबीर है। बन्धन का शत्रु अर्थात् बन्दी छोड़ कबीर परमेश्वर है। - यजुर्वेद अध्याय 5 मंत्र 32 कबीर परमात्मा आयु बढ़ा देते हैं। 600 साल पहले उन्होंने अपने गुरुदेव स्वामी रामानंद का कटा हुआ शीश पुनः धड़ पर लगाकर उनकी आयु बढ़ा दी थी। देखें प्रतिदिन साधना टीवी पर शाम 7:30  से पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब ने लाखों लोगों के बीच में एक मरे हुए लड़के को जिंदा कर दिया था। लोगों ने कहा कबीर जी ने कमाल कर दिया। इसलिए कबीर साहेब ने उस लड़के का नाम कमाल रख दिया था। देखें प्रतिदिन ईश्वर टीवी पर शाम 8:30 से

कबीर प्रकट दिवस14जून

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Supreme God is Kabir Lord Kabir Our Savior पाप विनाशक कबीर प्रभु सम्पूर्ण शांति दायक, कविरंघारिसि = कबीर परमेश्वर (अंघ) पाप का (अरि) शत्रु (असि) है अर्थात् पाप विनाशक कबीर है। बन्धन का शत्रु अर्थात् बन्दी छोड़ कबीर परमेश्वर है। - यजुर्वेद अध्याय 5 मंत्र 32 ♦️14 जून कबीर प्रकट दिवस के उपलक्ष्य में जरूर जानें अद्भुत बातें♦️ कबीर परमेश्वर जी का मानव समाज को विशेष संदेश हम सभी जानते हैं कि कबीर साहेब आज से लगभग 600 वर्ष पहले इतिहास के भक्तियुग में जुलाहे की  भूमिका निभाकर गये। जिनको हम सभी संत कबीर के नाम से जानते हैं परन्तु वास्तव में कौन हैं? इससे आज भी हम अपरिचित है इन सब से परिचित होने के लिए हमे हमारे धर्म ग्रन्थों को देखना होगा और इस सच को स्वीकार करना होगा कि कबीर साहिब ही पूर्ण परमात्मा है जिनका प्रमाण हमारे धर्मग्रंथों में है परमात्मा कबीर स्वयं ही पूर्ण परमात्मा का संदेशवाहक बनकर आते हैं और अपना तत्वज्ञान सुनाते हैं। 600 साल पहले कबीर साहेब जी ने भोली-भाली जनता को नकली पाखंडी, गुरुओं, पंडितों व संतों के बारे में बताया कि-  लाडू लावन लापसी, पूजा चढ़े अपार। पू...

कुरान

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कादर अल्लाह यथार्थ ज्ञान बताता है। शैतान (जिसे महापुरूषों ने ‘‘काल’’ कहा है) गुप्त रहता है। गुप्त रूप से अज्ञान व ज्ञान का मिश्रण मानव को देता है जो अधूरा अध्यात्म ज्ञान है। समर्थ परमेश्वर संत व सतगुरू के रूप में प्रत्यक्ष प्रकट होकर यथार्थ संपूर्ण अध्यात्म ज्ञान अपने मुख से बोलकर बताता है। परंतु सर्व मानव ने एक बात की रट लगा रखी है कि प्रभु निराकार है जबकि सर्व धर्मों के पवित्र ग्रन्थों में प्रमाण है कि खुदा मानव जैसा साकार है।  हजरत मुहम्मद जी मांस नहीं खाते थे। गरीब, नबी मुहम्मद नमस्कार है, राम रसूल कहाया। एक लाख अस्सी कूं सौगंध, जिन नहीं करद चलाया।। संत गरीबदास जी ने कहा है कि नबी मुहम्मद जी को मेरा नमस्कार (सलाम) है। वे (राम) अल्लाह के (रसूल) संदेशवाहक कहलाए। बाबा आदम से लेकर अंतिम नबी हजरत मुहम्मद जी तक एक लाख अस्सी हजार नबी हुए हैं तथा जो उनके अनुयाई उस समय थे, कसम है उन्होंने छुरी चलाकर जीव हिंसा नहीं की।   बाईबल तथा कुरआन का ज्ञानदाता एक है। जिस अल्लाह ने ''कुरआन‘‘ का पवित्र ज्ञान हजरत मुहम्मद पर उतारा। उसी ने पाक ''जबूर‘‘ का ज्ञान हजरत दाऊद पर, पाक...

StopWar

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UK स्थित Syrian Observatory for Human Rights (SOHR) ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि सीरिया में ग्रह युद्ध के चलते दिसंबर 2020 तक 387,118 मौतें दर्ज की थी। इनमें 116,911 सीरिया के नागरिक थे। इस आंकड़े में वो 205,300 लोग शामिल नहीं हैं, जो लापता हैं और मृत समझे जाते हैं। करीब 88,000 नागरिकों के सरकारी जेलों में टॉर्चर से मौत हो चुकी है। UNICEF के मुताबिक, लगभग 12,000 बच्चों की या तो मौत हुई है या वो गंभीर रूप से घायल हैं

Adham

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एक अधम शाह नाम का फकीर था। उसने बलख शहर से कुछ दूर एक कुटिया बना रखी थी। शहर में घूमने-फिरने आता था। एक दिन उसने बलख के बादशाह की इकलौती बेटी को देखा। वह युवा तथा सुंदर थी।  अधम शाह के मन में दोष उत्पन्न हो गया और राजा के पास जाकर कहा कि इस लड़की का विवाह मेरे से कर दो। राजा हैरान रह गया। फकीर कहीं शाॅप न दे दे, इसलिए डर भी गया। अचानक हाँ या ना नहीं कह सका, कल आने को कहा। मंत्रियों को पता चला।  एक राय बनी कि कल उसे कह देंगे कि राजा की लड़की से विवाह करने के लिए मोतियों का एक हार लाना पड़ता है या सौ मोती लाने होते हैं। अन्यथा विवाह नहीं होता। अगले दिन फकीर को यह शर्त बता दी गई। फकीर मोती लेने चला। किसी ने बताया कि मोती तो समुद्र में मिलते हैं। समुद्र के किनारे जाकर अपने करमण्डल (लोटे) से समुद्र का जल भरकर कुछ दूरी पर रेत में डालने लगा। कई दिन तक भूखा-प्यासा इसी प्रयत्न में लगा रहा।  शरीर भी समाप्त होने को आया। जो भी देखता, वही कहता कि अल्लाह के लिए घर त्यागा था। अब नरक की तैयारी कर रहा है। समुद्र कभी खाली नहीं हो सकता। भक्ति कर। परमात्मा जिंदा बाबा के वेश में वहाँ प्रकट हुए त...

कृष्मश

En se suicidant, les gens détruisent leur corps et mettent fin à leur vie humaine, mais une chaîne sans fin de problèmes et de chagrins s'enclenche, ce qui est bien plus que ce à quoi ils étaient confrontés ici ! Le Dieu tout-puissant Kabir peut détruire la malédiction des mauvaises actions car il est l'autorité ultime pour faire de même. Suivez le vrai chemin de l'adoration et faites l'expérience de la sérénité ! Lorsque les gens mettent fin à leur corps humain en se suicidant, les problèmes qu'ils pensaient disparaître, atteignent le sommet le plus élevé car les souffrances de l'enfer doivent être affrontées parce qu'ils ont commis le plus grand péché en mettant fin à leur vie humaine par eux-mêmes ! Ensuite, les atrocités de 84 formes de vie lakh font des ravages, les faisant pleurer. Lorsqu'une feuille se détache de la branche de l'arbre, elle ne peut plus y être attachée. De même, le don du corps humain est le plus rare de tous les trésors car c...

सत्य

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सरकार के तलवे चाटने वाले बाबा रामदेव स्वस्थ होते हुए भी जान बूझकर कोर्ट में पेश नही हो रहे, लेकिन दूसरी और संत रामपाल जी महाराज  पूरे ज्यूडिशरी सिस्टम और सरकार की करतूतों को समाज के सामने लेकर आये, इसी कारण अस्वस्थ होते हुए भी इसी सरकार ने संत रामपाल जी महाराज को गिरफ्तार करने के लिए 45000 हजार जवान भेजे। आँशु गैस के गोले, गोलियां, वाटर केनन पता नही क्या क्या जुल्म किये गए। सरकार का कोई मंत्री या आलाधिकारी समझौते या मामले को समझने के मूड में नही दिखा। लेकिन अब देखना बाबा रामदेव को सरकार की चमचागिरी करने के एवज में हैलीकॉप्टर में लाया जाएगा। सरकार के मंत्री लाइन लगा कर बाबा को न्योता देने गए होंगे मामले को दबाने के लिए,  और हाँ एक और बात अगर बाबा रामदेव 3 अगस्त को भी पेश नही हुए तब भी हमारे न्यायलय का दोहरा चरित्र देखने को जरूर मिलेगा। बस इंतजार कीजिये। देखिए कैसे लोकतंत्र का चीरहरण किया जा रहा है। क्योंकि इसी दोहरे चरित्र को संत रामपाल जी महाराज ने समाज के सामने रखा, देखिए कैसे सरकार के चाटुकार संविधान का मजाक बना रहे हैं, बस यही फर्क संत रामपाल जी महाराज ने समझाया...

SolutionForDepression

SolutionForDepression Jeene Ki Raah  The human life will become successful after reading this book. Saint Rampal Ji Maharaj  Visit us- Satlok Ashram YouTube Channel Do not waste your Life and Never lose hope. Must Read the spiritual book "Way of Living" that can change your life forever.  For more information 👉 Stress causes severe mental and physical harm. The present atmosphere has scared the hearts and minds of the people. What will happen to us now? There is a remedy in such a situation, which can be avoided. Read precious book jeene ki raah

Gita

कबीरसागर_का_सरलार्थPart_3 '‘व्रत करना गीता अनुसार कैसा है‘‘ प्रातः काल धर्म दास वक्त से उठा। पहले खाना बनाने लगा। उस दिन भक्ति की कोई क्रिया नहीं की। पहले दिन जंगल से कुछ लकडि़याँ तोड़कर रखी थी। उनको चूल्हे में जलाकर भोजन बनाने लगा। एक लकड़ी मोटी थी। वह बीचो-बीच थोथी थी। उसमें अनेकां चीटियाँ थीं। जब वह लकड़ी जलते-जलते छोटी रह गई तब उसका पिछला हिस्सा धर्मदास जी को दिखाई दिया तो देखा उस लकड़ी के अन्तिम भाग में कुछ तरल पानी-सा जल रहा है। चीटियाँ निकलने की कोशिश कर रही थी, वे उस तरल पदार्थ में गिरकर जलकर मर रही थी। कुछ अगले हिस्से में अग्नि से जलकर मर रही थी। धर्मदास जी ने विचार किया। यह लकड़ी बहुत जल चुकी है, इसमें अनेकों चीटियाँ जलकर भस्म हो गई है। उसी समय अग्नि बुझा दी। विचार करने लगा कि इस पापयुक्त भोजन को मैं नहीं खाऊँगा। किसी साधु सन्त को खिलाकर मैं उपवास रखूँगा। इससे मेरे पाप कम हो जाएंगे। यह विचार करके सर्व भोजन एक थाल में रखकर साधु की खोज में चल पड़ा। परमेश्वर कबीर जी ने अन्य वेशभूषा बनाई जो हिन्दू सन्त की होती है। एक वृक्ष के नीचे बैठ गए। धर्मदास जी ने साधु को देखा। उनके सामन...

kabir is god

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#UnknownMiraclesOfGodKabir कबीर, राम नाम से खिज मरैं, कुष्टि हो गल जाय।  शुकर होकर जन्म ले, नाक डूबता खाय।। कबीर जी ने कहा है कि अभिमानी व्यक्ति राम नाम की चर्चा से खिज जाता है। फिर कोढ़ (कुष्ट रोग) लगकर गलकर मर जाता है। Kabir Prakat Diwas 24 June

BodhDiwas_Of_SaintRampal ji

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 17 फरवरी को उस महान सन्त का बोध दिवस है जिनके द्वारा बताई गई सतभक्ति से हमारे पापों का नाश होता है। जिससे हमारे दुःख दूर होते हैं। और हमें परमात्मा से लाभ मिलना शुरू हो जाते हैं।  सभी भविष्यवक्ताओं के अनुसार भारत का एक महापुरुष विश्व को मानवता के सूत्र में बांध देगा व हिंसा, दुराचार, कपट संसार से सदा के लिए मिटा देगा। वह महापुरुष कोई और नहीं बल्कि जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ही हैं जिनका आज 17 फरवरी 2021 को बोध दिवस  (आध्यात्मिक जन्म दिवस) है

god

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Complete salvation is only possible after obtaining scripture based  way of worship from a complete Guru. True way of worship is available with Saint Rampal Ji Maharaj only. Must take refuge in Him. By worshipping the supreme God Kabir one attains complete salvation. Without salvation one remains in the cycle of birth and death. God Kabir only can end the painful cycle of birth and death. Those who do not worship supreme god Kabir, who is the creator of all, experience intense sufferings. Without true worship of God Kabir, one suffers in the lives of animals, birds etc. - Saint Rampal Ji Maharaj All the living beings have originated from supreme God Kabir. He is the father of all souls. He is the giver of life and the bestower of happiness. - Saint Rampal Ji Maharaj Supreme God Kabir is the ocean of happiness and the enemy of sins. He is the giver of supreme peace. He is the enemy of bondage. He is called the Liberator. - Saint Rampal Ji Maharaj

भाई दूज

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भ्रातृ द्वितीया कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला हिन्दू धर्म का पर्व है जिसे यम द्वितीया भी कहते हैं। यह दीपावली के दो दिन बाद आने वाला ऐसा पर्व है, जो भाई के प्रति बहन के स्नेह को अभिव्यक्त करता है एवं बहनें अपने भाई की खुशहाली के लिए कामना करती हैं परमात्मा कबीर जी की महिमा से अनजान दिल्ली के बादशाह सिकंदर लोदी ने गर्भवती गाय के दो टुकड़े किये और कबीर जी से उसे जिंदा करने के लिए कहा। परमेश्वर कबीर जी ने बच्चे और गाय दोनों को तुरंत जिंदा कर दिया। सच्चे रक्षक परमात्मा कबीर कबीर परमात्मा ने अपने शिष्य दामोदर सेठ के डूबते हुए जहाज को बचाकर सैंकड़ों लोगों की रक्षा की थी। कबीर परमात्मा आयु बढ़ा देते हैं। 600 साल पहले उ न्होंने अपने गुरुदेव स्वामी रामानंद का कटा हुआ शीश पुनः धड़ पर लगाकर उनकी आयु बढ़ा दी थी। Watch sadhna chennal7,30pm पाप विनाशक कबीर प्रभु सम्पूर्ण शांति दायक, कविरंघारिसि = कबीर परमेश्वर (अंघ) पाप का (अरि) शत्रु (असि) है अर्थात् पाप विनाशक कबीर है। बन्धन का शत्रु अर्थात् बन्दी छोड़ कबीर परमेश्वर है। - यजुर्वेद अध्याय 5 मंत...

नाग पंचमी

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नागपंचमी को सांप पंचमी क्यों नहीं कहा जा सकता? सरीसृप प्रजाति के प्राणी को पूजा जाता है, वह सर्प है किंतु नाग तो एक जाति है, जिनके अलग-अलग मत है- यक्षों की एक समकालीन जाति सर्प चिन्ह वाले नागों की थी, यह भी दक्षिण भारत में पनपी थी। नागों ने लंका के कुछ भागों पर ही नहीं, वरन प्राचीन मालाबार पर अधिकार जमा रखा था।    रामायण में सुरसा को नागों की माता और समुद्र को उनका अधिष्ठान बताया गया है। महेंद्र और मैनाक पर्वतों की गुफाओं में भी नाग निवास करते थे। हनुमानजी द्वारा समुद्र लांघने की घटना को नागों ने प्रत्यक्ष देखा था।    नागों की स्त्रियां अपनी सुंदरता के लिए प्रसिद्ध थी। रावण ने कई नाग कन्याओं का अपहरण किया था। प्राचीन काल में विषकन्याओं का चलन भी कुछ ज्यादा ही था। इनसे शारीरिक संपर्क करने पर व्यक्ति की मौत हो जाती थी। ऐसी विषकन्याओं को राजा अपने राजमहल में शत्रुओं पर विजय पाने तथा षड्यंत्र का पता लगाने हेतु भी रखा करते थे। संसार के अधिकतर लोग अंधविश्वास और मान्यताओं के कारण पुण्य-पाप और सही-गलत के भय में  भ्रमित जीवन जी रहे हैं जिसके कारण उनके दैनिक क...

सही शिक्षा क्या है

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शिक्षा मानव को एक अच्छा इंसान बनाती है। शिक्षा में ज्ञान, उचित आचरण और तकनीकी दक्षता, शिक्षण और विद्या प्राप्ति आदि समाविष्ट हैं। इस प्रकार यह कौशलों (skills), व्यापारों या व्यवसायों एवं मानसिक, नैतिक और सौन्दर्यविषयक के उत्कर्ष पर केंद्रित है।[1] शिक्षा, समाज एक पीढ़ी द्वारा अपने से निचली पीढ़ी को अपने ज्ञान के हस्तांतरण का प्रयास है। इस विचार से शिक्षा एक संस्था के रूप में काम करती है, जो व्यक्ति विशेष को समाज से जोड़ने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है तथा समाज की संस्कृति की निरंतरता को बनाए रखती है। बच्चा शिक्षा द्वारा समाज के आधारभूत नियमों, व्यवस्थाओं, समाज के प्रतिमानों एवं मूल्यों को सीखता है। बच्चा समाज से तभी जुड़ पाता है जब वह उस समाज विशेष के इतिहास से अभिमुख होता है। शिक्षा व्यक्ति की अंतर्निहित क्षमता तथा उसके व्यक्तित्त्व का विकसित करने वाली प्रक्रिया है। यही प्रक्रिया उसे समाज में एक वयस्क की भूमिका निभाने के लिए समाजीकृत करती है तथा समाज के सदस्य एवं एक जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए व्यक्ति को आवश्यक ज्ञान तथा कौशल उपलब्ध कराती है। शिक्षा शब्द संस्कृत भाषा...

सच्चा परमात्मा कबीर है

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‘‘कबीर जी ही सतपुरूष हैं’’भावार्थ :-  यह फोटोकॉपी कबीर सागर के अध्याय ‘‘ज्ञान प्रकाश‘‘ के पृष्ठ 58 की है।सत्यलोक में जहाँ तक दृष्टि गई, धर्मदास जी ने देखा कि प्रकाश झलक रहा था।  परमेश्वर(सत्य पुरूष) के दरबार के द्वार पर एक द्वारपाल (सन्तरी) खड़ा था। उसको जिन्दा रूपमें नीचे से गए प्रभु ने कहा कि यह भक्त परमेश्वर जी के दर्शन करने मृतलोक से आयाहै, इसको प्रभु के दर्शन कराओ। जिन्दा वेशधारी परमेश्वर बाहर ही बैठ गए थे। द्वारपाल ने एक अन्य हंस (सत्यलोक में भक्त को हंस तथा भक्तमती को हंसनी कहते हैं) से कहा किआप इस भक्त को सत्यपुरूष के दर्शन कराओ। जब वह हंस धर्मदास जी को दर्शन के लिएलेकर चला तो बहुत सारे हंस आ गए और धर्मदास जी का स्वागत करते हुए नाचते हुएआगे-आगे चले। उनका शरीर विशाल था, गले में रत्नों की माला थी। उनके नाक, मुख,गर्दन की शोभा अनोखी थी। सोलह सूर्यों जितना शरीर का प्रकाश था। उनके रोम (शरीरके बाल) की चमक रत्न (हीरे) जितनी थी। उनका  शरीर अमर (अविनाशी) है। सब मिलकरपुरूष दरबार में गए। सत्यपुरूष जी सिंहासन पर बैठे थे। उनके एक रोम का प्रकाश करोड़चन्द्...

काशी

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करोंत लेने से कोई लाभ नहीं होगा।‘‘काशी में करौंत की स्थापना की कथा’’शास्त्राविधि त्यागकर मनमाना आचरण करने यानि शास्त्रों में लिखी भक्ति विधिअनुसार साधना न करने से गीता अध्याय 16 श्लोक 23 में लिखा है कि उस साधक को नतो सुख की प्राप्ति होती है, न भक्ति की शक्ति (सिद्धि) प्राप्त होती है, न उसकी गति(मुक्ति) होती है अर्थात् व्यर्थ प्रयत्न है। हिन्दू धर्म के धर्मगुरू जो साधना साधक समाज कोबताते हैं, वह शास्त्रा प्रमाणित नहीं है। जिस कारण से साधकों को परमात्मा की ओर से कोईलाभ नहीं मिला जो भक्ति से अपेक्षित किया। फिर धर्मगुरूओं ने एक योजना बनाई ि ‘‘सुमिरन के अंग’’ का सरलार्थ ‘‘सुमिरन के अंग’’ का सरलार्थ ‘‘सुमिरन के अंग’’ का सरलार्थभगवान शिव का आदेश हुआ है कि जो काशी नगर में प्राण त्यागेगा, उसके लिए स्वर्ग काद्वार खुल जाएगा। वह बिना रोक-टोक के स्वर्ग चला जाएगा। जो मगहर नगर (गोरखपुरके पास उत्तरप्रदेश में) वर्तमान में जिला-संत कबीर नगर (उत्तर प्रदेश) में है, उसमें मरेगा,वह नरक जाएगा या गधे का शरीर प्राप्त करेगा। गुरूजनों की प्रत्येक आज्ञा का पालनकरना अनुयाईयों का परम धर्म माना गया है।  ...

जन्माष्टमी

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श्री कृष्ण जी का जन्म मथुरा में हुआ था जब कंस अपनी बहन देवकी की शादी अपने दोस्त वासुदेव के साथ करके उन्हें रथ पर विदाई करने पहुचा उसी समय आकाशवाणी हुई कि कंश तुम्हें देवकी का 8 वां पुत्र मारेगा। उसी समय कंस ने देवकी और वासुदेव को बंदी बना लिया और कारागृह में डाल दिया और देवकी की 6 संतान को कंस ने मार दिया और सातवीं संतान बलराम था और आठवां श्री कृष्ण जी का जन्म हुआ जिनको रातों-रात महल भेज दिया वही उनकी परवरिश हुई। जब श्रीकृष्ण जी का जन्म हुआ उस समय भाद्रपद आठम थी इसलिए जन्माष्टमी नाम दिया गया। भगवान श्रीकृष्ण जी विष्णु जी के अंश थे। आध्यात्मिक तोर से देखा जाए तो भगवान श्रीकृष्ण जी अत्याचार के खिलाफ थे लेकिन उनके पास भी किसी तहसीलदार के पास जो पावर होती है वह उतना ही कर सकते हैं कलेक्टर का वो नहीं कर सकते हैं इसी प्रकार भगवान श्रीकृष्ण जी के पास भी सीमित शक्ति थी। जैसे कोई व्यक्ति उम्र पुरी होने से पहले किसी कारण वश खत्म हो जाता तो श्रीकृष्ण जी जीवित कर देते थे मगर जिसकी उम्र पुरी हो जाती है उसे जीवित नहीं कर सकते थे जैसे श्रीकृष्ण जी कि बहन सुभद्रा का पुत्र अभिमन्यु चक्रव्यु...

ज्ञान

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17 में भी है कि नाश रहित उस परमात्मा को जान जिसका नाश करने में कोईसमर्थ नहीं है। अपने विषय में गीता ज्ञान दाता (ब्रह्म) प्रभु अध्याय 4 मंत्रा 5 तथाअध्याय 2 श्लोक 12 में कहा है कि मैं तो जन्म-मृत्यु में अर्थात् नाशवान हूँ।उपरोक्त संसार रूपी वृक्ष की मूल (जड़) तो परम अक्षर पुरुष अर्थात् पूर्णब्रह्म कविर्देव है। इसी को तीसरा अव्यक्त प्रभु कहा है। वृक्ष की मूल से ही सर्व पेड़को आहार प्राप्त होता है। इसीलिए गीता अध्याय 15 श्लोक 17 में कहा है किवास्तव में परमात्मा तो क्षर  पुरुष अर्थात् ब्रह्म तथा अक्षर पुरुष अर्थात् परब्रह्म सेभी अन्य ही है। जो तीनों लोकों में प्रवेश करके सबका धारण-पोषण करता है वहीवास्तव में अविनाशी है।1. क्षर का अर्थ है नाशवान। क्योंकि ब्रह्म अर्थात् गीता ज्ञान दाता ने तो स्वयंकहा है कि अर्जुन तू तथा मैं तो जन्म-मृत्यु में हैं (प्रमाण गीता अध्याय 2 श्लोक12, अध्याय 4 श्लोक 5 में)।2. अक्षर का अर्थ है अविनाशी। यहां परब्रह्म को भी स्थाई अर्थात् अविनाशीकहा है। परंतु यह भी वास्तव में अविनाशी नहीं है। यह चिर स्थाई है जैसे एकमिट्टी का प्याला है जो सफेद रंग का चाय प...

तीन देव्

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“अन्य देवताओं (रजगुण ब्रह्मा जी, सतगुण विष्णु जी, तमगुणशिवजी) की पूजा अनजान ही करते हैं”अध्याय 7 के श्लोक 20 में कहा है कि जिसका सम्बन्ध अध्याय 7 के श्लोक15 से लगातार है - श्लोक 15 में कहा है कि त्रिगुणमई माया (जो रजगुण ब्रह्माजी, सतगुण विष्णु जी, तमगुण शिव जी की पूजा तक सीमित हैं तथा इन्हीं से प्राप्तक्षणिक सुख) के द्वारा जिनका ज्ञान हरा जा चुका है एैसे असुर स्वभाव को धारणकिए हुए नीच व्यक्ति दुष्कर्म करने वाले मूर्ख मुझे नहीं भजते। अध्याय 7 के श्लोक20 में उन-उन भोगों की कामना के कारण जिनका ज्ञान हरा जा चुका है वे अपनेस्वभाव वश प्रेरित हो कर अज्ञान अंधकार वाले नियम के आश्रित अन्य देवताओं कोपूजते हैं। अध्याय 7 के श्लोक 21 में कहा है कि जो-जो भक्त जिस-जिस देवता केस्वरूप को श्रद्धा से पूजना चाहता है उस-उस भक्त की श्रद्धा को मैं उसी देवता केप्रति स्थिर करता हूँ।अध्याय 7 के श्लोक 22 में कहा है कि वह जिस श्रद्धा से युक्त हो कर जिसदेवता का पूजन करता है क्यांकि उस देवता से मेरे द्वारा ही विधान किए हुए कुछइच्छित भोगों को प्राप्त करते हैं। जैसे मुख्य मन्त्रा कहे कि नीचे के अधिकारी मेरेही नौकर है...