5जून

विभीषण और मंदोदरी को मिले थे परमात्मा
"कबीर सागर" में प्रमाण है कि त्रेतायुग में कबीर परमेश्वर जी मुनींद्र ऋषि के रूप में आए थे। विभीषण और मंदोदरी को शरण में लेकर उन्हें नाम उपदेश देकर सत्य भक्ति प्रदान की। पूरी लंका नगरी में केवल वे दोनों ही भक्ति भाव तथा साधु विचार वाले थे। जिस कारण उनका अंत नहीं हुआ।
कबीर सागर" के भोपाल बोध में विवरण मिलता है 
जालंधर नगर के राजा भोपाल को परमेश्वर कबीर साहेब ने शरण में लेकर सतभक्ति प्रदान की, सतलोक दिखाया। साथ ही राजा भोपाल की 9 रानियों, 50 पुत्रों और एक पुत्री को शरण में लेने का विवरण है।

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